कार्डियक अरेस्ट का मतलब होता है जब आपका दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है। जब दिल धड़कना बंद कर देता है, तो शरीर में खून का प्रवाह रुक जाता है और दिमाग तक ऑक्सीजन नहीं पहुंचती। इससे व्यक्ति बेहोश हो जाता है और अगर तुरंत इलाज न मिले तो कुछ ही मिनट में मौत हो सकती है।

आज के समय में हार्ट की बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है। कई बार हम सुनते हैं कि किसी को अचानक “कार्डियक अरेस्ट” आया और उसकी मृत्यु हो गई। ऐसे में जरूरी है कि हम समझें कि कार्डियक अरेस्ट क्या होता है, इसके लक्षण क्या होते हैं, और इससे कैसे बचा जा सकता है। आइए इस ब्लॉग में हम सरल भाषा में इसके बारे में पूरी जानकारी लेते हैं।
यह भी पढ़ें : लीवर की बीमारी के लक्षण: कारण, इलाज और बचाव के असरदार उपाय
कार्डियक अरेस्ट क्यों होता है?
कार्डियक अरेस्ट दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी में अचानक गड़बड़ी आने से होता है। इसके कारण दिल अनियमित तरीके से धड़कने लगता है या रुक जाता है। इसके पीछे कुछ कारण हो सकते हैं:
1️⃣ कोरोनरी आर्टरी डिजीज (दिल की नसों में ब्लॉकेज)
2️⃣ दिल का दौरा (हार्ट अटैक)
3️⃣ दिल में इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी
4️⃣ दिल की मांसपेशियों में कमजोरी
5️⃣ हार्ट वाल्व डिजीज
6️⃣ अत्यधिक तनाव और धूम्रपान, शराब, और ड्रग्स का सेवन
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में फर्क क्या है?
बहुत लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक जैसा समझते हैं, लेकिन दोनों अलग होते हैं।
🔸 हार्ट अटैक: यह तब होता है जब दिल की नसों में ब्लॉकेज आ जाता है और दिल के किसी हिस्से में खून नहीं पहुंच पाता। उस समय दिल धड़कता रहता है।
🔸 कार्डियक अरेस्ट: इसमें दिल की धड़कन अचानक बंद हो जाती है, जिससे खून का बहाव रुक जाता है। यह हार्ट अटैक के दौरान भी हो सकता है।
यह भी पढ़ें : कैंसर से मौत : नियमित एक्सरसाइज और दवाई दोनों ही खतरे को कम करती है

कार्डियक अरेस्ट के लक्षण
कार्डियक अरेस्ट आने से पहले कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं:
✔ अचानक बेहोश हो जाना
✔ सांस लेना बंद या धीमा हो जाना
✔ नाड़ी महसूस न होना
✔ गिरने से पहले सीने में दर्द या बेचैनी होना
✔ कमजोरी महसूस होना
✔ अचानक चक्कर आना
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें। अगर ऐसा कुछ दिखे, तुरंत मदद लें।
कार्डियक अरेस्ट आने पर क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट आ जाए, तो:
1️ तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करें।
2️ व्यक्ति को पीठ के बल सीधा लिटा दें।
3️ उसकी सांस और नाड़ी चेक करें।
4️ अगर सांस नहीं आ रही और नाड़ी नहीं चल रही है, तो तुरंत CPR (छाती पर दबाव) देना शुरू करें।
5️ अगर आसपास AED मशीन है, तो उसका इस्तेमाल करें।
6️ जब तक एम्बुलेंस न आ जाए, CPR देते रहें।
CPR कैसे दिया जाता है?
CPR का मतलब होता है दिल और फेफड़ों की क्रिया को फिर से शुरू करना।
1️ व्यक्ति को सीधा लिटा दें।
2️ उसके सीने के बीच में दोनों हाथों को रखें।
3️ अपनी कोहनी सीधी रखते हुए सीने को तेजी से और गहराई से दबाएं।
4️ हर मिनट में लगभग 100-120 बार दबाव दें।
5️ अगर सांस देने की ट्रेनिंग है, तो 30 दबाव के बाद 2 सांस दें।
कार्डियक अरेस्ट से बचने के उपाय
कार्डियक अरेस्ट को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतें अपनाकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है:
✅ नियमित रूप से हेल्थ चेकअप करवाएं।
✅ स्वस्थ और संतुलित भोजन करें।
✅ धूम्रपान और शराब का सेवन न करें।
✅ रोजाना 30 मिनट वॉक या योग करें।
✅ तनाव को कम करने की कोशिश करें।
✅ ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल में रखें।
✅ दिल की किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करें।
कार्डियक अरेस्ट का इलाज
1️ कार्डियक अरेस्ट आने पर तुरंत CPR और AED की मदद से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।
2️ अस्पताल में पहुंचने पर डॉक्टर दवाइयों और इलेक्ट्रिकल शॉक (Defibrillation) द्वारा दिल की धड़कन को फिर से शुरू कर सकते हैं।
3️ इसके बाद कारण जानने के लिए ECG, Echo, और अन्य जांच की जाती है।
4️ अगर दिल की नसों में ब्लॉकेज है, तो एंजियोप्लास्टी या बाईपास सर्जरी की जा सकती है।
5️ कुछ मामलों में पेसमेकर लगाने की सलाह दी जा सकती है।
निष्कर्ष
कार्डियक अरेस्ट एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें तुरंत इलाज जरूरी होता है। समय पर CPR और मेडिकल मदद मिलने से व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। इसलिए, हमें इसके लक्षण, कारण और प्राथमिक उपचार की जानकारी होनी चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हम दिल की बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं और अपने जीवन को सुरक्षित बना सकते हैं।

अगर यह जानकारी आपके लिए उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार में शेयर करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग कार्डियक अरेस्ट के बारे में जागरूक हो सकें और समय पर जान बचाई जा सके।