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गुरुग्राम में कूड़े के ढेर से क्यों बिखर गई सफाई व्यवस्था क्या है पूरी खबर?

गुरुग्राम में कूड़े के ढेर बढ़ने से स्वास्थ्य संकट बढ़ रहा है आखिर क्यों सफाई व्यवस्था ठप हो गई और इसका समाधान क्या है।

गुरुग्राम की चमचमाती इमारतें और लग्जरी सोसाइटीज अब कचरे के ढेर के बीच खड़ी नजर आ रही हैं। सड़कों पर काले कचरे के बैग, गंदगी और बदबू फैली हुई है। यह सिर्फ सफाई व्यवस्था का संकट नहीं है, बल्कि एक मानवीय संकट भी है, जो शहर की हकीकत को उजागर कर रहा है। दिन प्रतिदिन यह समस्या बढ़ती जा रही है

गुरुग्राम में कूड़े के ढेर

गुरुग्राम में कूड़े के ढेर से क्यों मचा हड़कंप?

बंगाली बोलने वाले मजदूरों की गिरफ्तारी

13 जुलाई से 21 जुलाई के बीच पुलिस ने 100 से ज्यादा बंगाली बोलने वाले मजदूरों को पकड़ लिया। इनमें से कई लोग घरों में काम करने वाले हेल्पर और कचरा इकट्ठा करने वाले थे। अचानक हुई इन गिरफ्तारियों से पूरे शहर में डर फैल गया।

पुलिस वेरिफिकेशन ड्राइव और डर का माहौल

पुलिस का कहना है कि यह ड्राइव अवैध अप्रवासियों को पकड़ने के लिए थी, लेकिन इसके कारण वैध डॉक्युमेंट्स वाले लोग भी डर गए और कई लोग रातों-रात शहर छोड़कर चले गए।

कैसे हुआ गुरुग्राम का कचरा सिस्टम फेल?

जब सफाई कर्मचारी गायब हो गए, तो हाउसिंग सोसाइटीज ने खुद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से कचरा डंपिंग पॉइंट पर ले जाना शुरू कर दिया।

बिना trained वर्कर्स के कचरा फेंका जा रहा है

जिन लोगों को कचरा फेंकने भेजा गया, उन्हें कचरा अलग-अलग करने का कोई अनुभव नहीं था, जिससे कचरा बिना छांटे ही फेंक दिया ।

कचरा जलाने और गलत जगह फेंकने की समस्या

कई जगह लोग कचरा जला रहे हैं, जिससे हवा में प्रदूषण बढ़ रहा है और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

नागरिकों का क्या कहना है?

जो लोग रातों-रात भाग गए उनमे से अधिक लोग कचरा उठाने वाले भी थे,

सेक्टर 57 की एक वेस्ट वॉलंटियर ऋचा वोहरा ने कहा, “हमें बताया तक नहीं, लोग अचानक डर के मारे चले गए।”

नागरिक संगठनों की चेतावनी

‘सिटिजंस फॉर क्लीन एयर’ और ‘व्हाई वेस्ट योर वेस्ट’ जैसी संस्थाओं ने MCG को चिट्ठी लिखकर चेताया कि अगर तुरंत उपाय नहीं किए गए, तो शहर में स्वास्थ्य आपदा आ सकती है।

 

पुलिस क्या कह रही है?

पुलिस का कहना है कि अवैध अप्रवासियों की पहचान के लिए MHA के गाइडलाइन्स के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

वैध डॉक्युमेंट्स के बाद भी लोग डरे हुए

पुलिस का कहना है कि अगर किसी का नागरिकता सत्यापित हो जाती है, तो उन्हें छोड़ दिया जाता है। लेकिन कई मजदूरों को डर है कि उनके कागज होने पर भी वे पकड़ लिए जाएंगे।

नगर निगम की लापरवाही

नगर निगम ने वेस्ट वर्कर्स को औपचारिक रूप से व्यवस्था में शामिल नहीं किया, ना ही कचरे को अलग-अलग करने की आदत डलवाई, जिससे सिस्टम कमजोर बना रहा।

इसका लोगों पर कैसा असर पड़ रहा है?

कचरे का सही निपटारा ना होने से मच्छर और बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।

रोजी-रोटी चलाने वाले कुक, ड्राइवर और सफाईकर्मी अचानक बेघर और बेरोजगार हो रहे हैं।

नगर निगम को निजी कंपनियों से टाई-अप कर तुरंत कचरा उठाने की व्यवस्था करनी चाहिए और जनता को जानकारी देनी चाहिए।

MCG कमिश्नर प्रदीप दहिया ने कहा, “हम इस स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर काम कर रहे हैं ताकि कचरा उठाने में रुकावट ना आए।”

फिलहाल गुरुग्राम की व्यवस्था इस संकट से निपटने में असमर्थ नजर आ रही है, जब तक मजदूर वापस नहीं लौटते या स्थायी समाधान नहीं होते।

अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो शहर में बीमारियां फैल सकती हैं, पर्यावरण प्रदूषित होगा और एक मानवीय संकट और बड़ा हो जाएगा।

FAQs

Q1: गुरुग्राम में कचरे का संकट क्यों आया है?
अचानक हुई पुलिस वेरिफिकेशन ड्राइव से बंगाली बोलने वाले मजदूर डरकर भाग गए, जिससे सफाई व्यवस्था टूट गई।

Q2: क्या नगर निगम समाधान निकाल रहा है?
नगर निगम ने कहा है कि वह वैकल्पिक व्यवस्था पर काम कर रहा है, लेकिन अभी जमीन पर स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है।

Q3: इससे स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ेगा?
कचरा जमा होने और जलाने से हवा प्रदूषित होगी, जिससे डेंगू और अन्य बीमारियां फैल सकती हैं।

Q4: नागरिकों ने क्या सुझाव दिए हैं?
उन्होंने ड्राई वेस्ट सेंटर बनाने, वॉर्ड स्तर पर कम्पोस्टिंग और निजी टाई-अप की मांग की है।

Q5: क्या यह सिर्फ गुरुग्राम का मुद्दा है?
नहीं, यह हर शहर के लिए सबक है कि बिना मजदूरों की सुरक्षा और सही वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के कोई भी स्मार्ट सिटी नहीं बन सकती।

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