
कुछ दिनों से (DDA )दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने जामिया नगर बटला हाउस के इलाके में कई मकानों को खाली करने का नोटिस दिया जा चुका है इससे पहले डीडीए की टीम यहां पर मकान की मैपिंग और जांच पड़ताल करने पहुंचे जिस इलाके में अफरा तफरी माहौल बन गया बहुत से मकान मालिक को खाली करने का नोटिस भी जारी कर दिया है इन मकानों को 11 जून तक खाली करने का नोटिस दिया गया है.
हाल ही के दिनों में जामिया नगर और बटला हाउस में इन मकानों को गिराने के लिए डीडीए ने नोटिस जारी कर दिया है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने मकान को खाली करने के लिए नोटिस जारी किया है इसलिए यहां के निवासियों को 11 जून तक मकान खाली करने का आदेश दिया है इसी के तहत उससे पहले दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी ने मकान की मैपिंग करने के लिए पहुंचे हैं
दिल्ली के जामिया नगर स्थित बटला हाउस इलाके में जो घर अवैध बने हुए उनको अदालत ने फिलहाल राहत देने से मना कर दिया है और मना करते हुए उचित प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने का सुझाव दिया है जस्टिस संजय करोल और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की आकाश पीठ में दोस्तीकरण नोटिस पर अंतिम रोक लगाने से कार्य करते हुए मामले की अगली सुनवाई जुलाई में तय की गई है अभी फिलहाल इस पर कोई नरमी नहीं बर्ती जाएगी

यह याचिका सुल्तान शाहीन और करीब 40 लोगों व अन्य संपत्ति मालिकों ने वकील आदिल अहमद के माध्यम से दायर की थी याचिका में कहा है कि 27 मई को उनके घरों पर 15 दिन के भीतर खाली करने का नोटिस लगा दिया गया है यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के 7 मई के आदेश के बाद जारी किया गया जिसमें डीडीए और दिल्ली सरकार को अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे
क्या वजह है डिमोलिशन की
अमर उजाला में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्हें ना तो इस मामले में पक्षकार बनाया गया और ना ही अपनी बात रखने का कोई मौका दिया गया. उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19 (1) (e) और 21 के तहत प्राप्त मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि उनके पास घर के सभी दस्तावेज मौजूद हैं वह 2014 से पहले का कब्जा प्रमाण और संपत्ति अधिकार अधिनियम 2019 के तहत रह रहे है साथ ही कहा गया है कि सिर्फ पीएम उदय योजना के कवरेज से बाहर होने के नाम पर डिमोलिशन की कार्रवाई गलत है सुप्रीम कोर्ट ने मामले में दखल देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को संबंधित प्राधिकरणों से संपर्क करने की सलाह दी है और कहा है इससे संबंधित जितने भी अधिकारी हैं आप उनसे बात करें वही इस समस्या का समाधान निकालेंगे सुप्रीम कोर्ट में इसका कोई समाधान नहीं है
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