दिल्ली पुलिस ने नकली IAS अधिकारी बनकर देशभर में धोखाधड़ी करने वाले को पकड़ा

दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो खुद को IAS अधिकारी बताकर देशभर के व्यापारियों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था।

पुलिस ने बताया कि इस गैंग का मास्टरमाइंड सौरभ सिंह है, जिसे हाल ही में लखनऊ से गिरफ्तार किया गया। इससे पहले उसके साथी रत्नाकर उर्फ करुणाकर उपाध्याय और अनीता उपाध्याय को जुलाई में ही पकड़ा जा चुका था।

कैसे चल रहा था फर्जीवाड़ा?

ये आरोपी लोग “राष्ट्रीय ग्रामीण साक्षरता मिशन (RGSM)” के नाम से एक फर्जी ट्रस्ट और वेबसाइट चला रहे थे। वेबसाइट और लेटरहेड्स देखकर कोई भी यही समझेगा कि यह सचमुच केंद्र सरकार की योजना है।

इन्होंने सरकारी स्कीम जैसा माहौल बनाकर व्यापारियों को भरोसे में लिया और उनसे स्कूल यूनिफॉर्म सप्लाई करने के कॉन्ट्रैक्ट किए।

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दिल्ली पुलिस

ठगी का तरीका

  1. आरोपी खुद को IAS अधिकारी बताकर विश्वास जीतते थे।
  2. व्यापारियों को यूनिफॉर्म सप्लाई के बड़े ऑर्डर दिलाने का वादा करते।
  3. यूनिफॉर्म सप्लाई हो जाने के बाद भुगतान नहीं करते
  4. उल्टा उनसे कमिशन, अर्नेस्ट मनी और स्टांप ड्यूटी के नाम पर मोटी रकम ऐंठ लेते।

2 करोड़ की चपत

एक ही शिकायतकर्ता से इन्होंने करोड़ों रुपये की यूनिफॉर्म तो ले ही ली, साथ ही करीब 2 करोड़ रुपये “कमिशन” के नाम पर भी वसूल लिए।

पुलिस की कार्रवाई

जांच के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में सामान और संपत्ति बरामद की:

  • लगभग 45,000 यूनिफॉर्म (कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपये)
  • 2.79 लाख रुपये नकद
  • सोने की चेन और अंगूठी
  • एक कार
  • साथ ही, आरोपियों द्वारा खरीदे गए दो फ्लैट्स भी जब्त किए जा रहे हैं।

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दिल्ली पुलिस

आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड

  • रत्नाकर: इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश में पहले से ही 10 से ज्यादा मामले दर्ज हैं, जिनमें धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और बलात्कार जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं।
  • सौरभ सिंह: इस पर अयोध्या में गैंगस्टर एक्ट और फर्जीवाड़े के दो केस चल रहे हैं।
  • अनीता उपाध्याय: यह ट्रस्ट की हेड थी और खातों की अधिकृत साइन करने वाली थी। siphoned money यानी गबन की गई रकम का सीधा फायदा इसी को मिलता था।

देशभर में केस दर्ज

दिल्ली पुलिस ने बताया कि अभी तक इस गिरोह के खिलाफ दिल्ली में 6 केस दर्ज हो चुके हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में भी कई केस पेंडिंग हैं।

निष्कर्ष

यह मामला साफ दिखाता है कि कैसे कुछ लोग सरकारी नाम और पद का झांसा देकर आम लोगों को बेवकूफ बनाते हैं। अच्छी बात यह है कि पुलिस की सतर्कता से एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ और करोड़ों की ठगी करने वाले अब सलाखों के पीछे हैं।

FAQs

Q1. आरोपी खुद को IAS अधिकारी कैसे साबित करता था?
फर्जी लेटरहेड, वेबसाइट और सरकारी जैसा माहौल बनाकर वह लोगों को भ्रमित करता था।

Q2. इस गिरोह ने कितनी रकम की ठगी की?
करीब 2 करोड़ रुपये नकद और करोड़ों रुपये की यूनिफॉर्म सप्लाई।

Q3. पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?
45,000 यूनिफॉर्म, 2.79 लाख रुपये, सोने के गहने, कार और दो फ्लैट्स।

Q4. आरोपियों पर पहले से कितने केस हैं?
रत्नाकर पर 10 से ज्यादा, सौरभ पर 2 केस, और अनीता पर भी कई मामले चल रहे हैं।

Q5. इस मामले से क्या सीख मिलती है?
किसी भी सरकारी योजना या टेंडर में निवेश करने से पहले उसकी सत्यता और आधिकारिक स्रोत जरूर जांचें।

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