दिल्ली में मानसून आने से 16 साल का रिकॉर्ड टूटेगा IMD ने बताया की भारी बारिश आने की संभावना है
दिल्ली में तापमान एक बार फिर बढ़ गया है जिससे काफी गर्मी हो गई है अब दिल्ली वासियों को मानसून का इंतजार रहेगा की मानसून कब आएगा IMD के अनुसार अगले 2 दिनों में मानसून राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली सहित पश्चिम उत्तर प्रदेश हिमाचल और जम्मू कश्मीर के पास बाकी 2 दिनों में आ सकने की संभावना जताई है और यह भी कहा है कि इस बार उत्तर-भारत में मानसून 16 साल का रिकॉर्ड भी तोड़ेगा इसका मतलब है कि उत्तर-भारत में अधिक बारिश होने की संभावना है IMD के अनुसार 24 जून को मानसून दिल्ली में दस्तक देगा अब देखना यह होगा कि अगर 24 जून को दिल्ली में मानसून आता है तो यह 2013 के बाद सबसे जल्दी आने वाला मानसून होगा क्योंकि 2013 में मानसून 16 जून को दिल्ली पहुंचा था और इसके बाद से अब तक इतनी जल्दी मानसून नहीं आया है

किन राज्यों में IMD ने जारी की है भारी बारिश की चेतावनी
IMD (मौसम विभाग) ने बताया है कि उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य प्रदेश, गुजरात, कोंकण और गोवा में 26 जून तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। खासकर 23 और 24 जून को मध्य प्रदेश में बहुत ज्यादा बारिश की चेतावनी दी गई है।
पूर्वोत्तर भारत में भी अगले तीन दिनों तक तेज बारिश के आसार हैं, लेकिन उसके बाद बारिश थोड़ी कम हो जाएगी। इस साल मानसून ने 24 मई को केरल में दस्तक दी थी, जो 2009 के बाद सबसे जल्दी है। तब 2009 में मानसून 23 मई को केरल पहुंचा था।
शुरुआत में मानसून तेज़ी से आगे बढ़ा और 29 मई तक मुंबई, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में पहुंच गया था। लेकिन 29 मई से 16 जून के बीच इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी।
जून की शुरुआत में जब मानसून की रफ्तार धीमी हो गई, तो गर्मी बढ़ गई और 8-9 जून से उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई हिस्सों में लू चलने लगी।
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हालांकि 16 जून के बाद फिर से मानसून ने रफ्तार पकड़ी, जब बंगाल और गुजरात के पास दो नए कम दबाव के क्षेत्र बने।
1 जून को केरल पहुंचता है,
11 जून को मुंबई आता है,
और 30 जून तक दिल्ली पहुंच जाता है।
8 जुलाई तक यह पूरे देश को कवर कर लेता है।
मानसून की वापसी 17 सितंबर से उत्तर-पश्चिम भारत से शुरू होती है और 15 अक्टूबर तक पूरा देश इससे मुक्त हो जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून कब शुरू होता है, इसका सीधा असर कुल बारिश पर नहीं पड़ता। यानी अगर केरल या मुंबई में मानसून जल्दी या देर से आता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि देश के बाकी हिस्सों में भी वैसा ही होगा।
बारिश की मात्रा कई चीज़ों पर निर्भर करती है – जैसे वैश्विक मौसम, स्थानीय स्थिति और क्षेत्रीय बदलाव। इसलिए हर साल इसमें फर्क देखा जाता है।
मौसम विभाग ने मई में अनुमान लगाया था कि इस साल जून से सितंबर के बीच देश में औसत से ज्यादा यानी 106% बारिश हो सकती है।
हालांकि कुछ जगहों पर कम बारिश होने की संभावना है, जैसे:
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लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, पूर्वोत्तर राज्य, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, पंजाब, हरियाणा, केरल और तमिलनाडु के कुछ हिस्से।
भारत की कृषि का बहुत बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर है।
यह देश की 42% आबादी की रोज़ी-रोटी का जरिया है और GDP का लगभग 18.2% हिस्सा कृषि से आता है। इसलिए अच्छा मानसून देश के लिए बहुत जरूरी होता है।