नेपाल प्रदर्शन इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट का सामना कर रहा है। सोशल मीडिया पर बैन से शुरू हुआ मामला अचानक पूरे देश में जनआंदोलन में बदल गया। युवाओं, खासकर Gen Z ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और नेताओं की अकर्मण्यता के खिलाफ सड़कों पर उतरकर इतना बड़ा प्रदर्शन किया कि प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। लेकिन इस उथल-पुथल ने मौतें, विनाश और अनिश्चित भविष्य पीछे छोड़ दिया है।

सरकार ने फेसबुक, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगाया। युवाओं को लगा कि यह उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। शुरुआत में यह गुस्सा ऑनलाइन दिखा, लेकिन जल्द ही यह वास्तविक सड़कों पर उतर आया।
आंदोलन सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भ्रष्टाचार, खराब शासन और असमानता के खिलाफ एक बड़ी लहर में बदल गया।
मौतें और तबाही
अब तक पुलिस ने पुष्टि की है कि 51 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें एक भारतीय नागरिक और तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।
सैकड़ों लोग घायल हैं और अस्पतालों में भर्ती हैं। प्रदर्शनकारियों ने कई पुलिस थानों, सरकारी इमारतों और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।
जेल तोड़ और कैदियों का फरार होना
प्रदर्शनकारियों ने कई जेलों पर हमला किया। नतीजतन 12,500 से ज्यादा कैदी पूरे नेपाल में फरार हो गए।
काठमांडू की नक्कु जेल से ही करीब 3,000 कैदी भाग निकले। यही वह जेल है, जहां कभी विवादित नेता और RSP प्रमुख रवि लामिछाने भी रहे थे।
हिंसा और विरोध ने प्रधानमंत्री ओली को मजबूर कर दिया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। संसद भवन तक को प्रदर्शनकारियों ने आग लगा दी।
नेपाल अब एक राजनीतिक शून्य में है और अंतरिम सरकार बनने का इंतजार कर रहा है।
अब नेपाल का नेतृत्व कौन करेगा?
प्रदर्शनकारी युवाओं ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने की मांग की है। वे 73 साल की हैं और अपनी ईमानदारी व सख्ती के लिए जानी जाती हैं।
हालांकि, राजनीतिक दलों और सेना के बीच अभी सहमति नहीं बन पाई है। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल और सेना प्रमुख लगातार चर्चा कर रहे हैं।

लोग इतने नाराज़ क्यों हैं?
नेपाल में लंबे समय से भ्रष्टाचार गहराई तक फैला हुआ है। पढ़े-लिखे नौजवानों को नौकरी नहीं मिलती और उन्हें विदेश जाकर मजदूरी करनी पड़ती है।
वहीं, नेता और अफसर आलीशान जीवन जीते हैं। यह असमानता आखिरकार गुस्से का ज्वालामुखी बन गई और Gen Z सड़कों पर उतर आया।
विदेशी नागरिकों की परेशानी
हिंसा और कर्फ्यू की वजह से हजारों विदेशी नागरिक नेपाल में फंस गए। सरकार ने उनके लिए अब वीजा और एग्जिट नियम आसान कर दिए हैं।
जिन पर्यटकों का वीजा 8 सितंबर के बाद खत्म हो गया था, वे अब बिना जुर्माने के जा सकते हैं। जिनका पासपोर्ट गुम हो गया है, उनके लिए अस्थायी व्यवस्था भी की गई है।
भारत पर असर
यह संकट भारत तक भी पहुंचा। दिल्ली से काठमांडू जाने वाली DTC बस सेवा नेपाल में फंस गई। पाशुपतिनाथ मंदिर से लौट रहे
भारतीय पर्यटकों की बस पर भीड़ ने हमला कर दिया, जिसमें कई लोग घायल हो गए। बाद में भारतीय दूतावास ने विशेष विमान की व्यवस्था कर उन्हें भारत वापस लाया।
खेल जगत पर असर
नवंबर में होने वाला महिला ब्लाइंड T20 वर्ल्ड कप का कुछ हिस्सा काठमांडू में होना था। लेकिन हालात बिगड़ने के कारण अब यह मैच भारत में कराए जाएंगे।
न्यायपालिका पर हमला
प्रदर्शनकारियों ने नेपाल के सुप्रीम कोर्ट को भी नहीं छोड़ा। वहां आगजनी हुई और दशकों पुराने रिकॉर्ड जलकर खाक हो गए। इस घटना की वकीलों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने कड़ी निंदा की।
क्या फिर से राजतंत्र लौट सकता है?
कुछ नागरिक संगठनों का आरोप है कि सेना की मदद से फिर से राजतंत्र बहाल करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन आंदोलनकारी इसे गद्दारी मानते हैं और कहते हैं कि इससे Gen Z आंदोलन की कुर्बानियां बेकार हो जाएंगी।
काठमांडू की सड़कों पर पुलिस की वापसी
दंगों में कई थाने जल गए थे। अब धीरे-धीरे पुलिस दोबारा सड़कों पर लौट रही है और सुरक्षा चौकियों को फिर से खोला जा रहा है। आर्म्ड पुलिस और नेपाल पुलिस की मौजूदगी फिर से दिख रही है।
जनता की उम्मीदें
नेपाल की जनता, खासकर युवा, अब बदलाव चाहती है। वे एक ऐसी सरकार चाहते हैं जो ईमानदार और विकास के लिए समर्पित हो। कई लोग सुशीला कार्की को इस अंधेरे दौर में उम्मीद की किरण मान रहे हैं।
नेपाल आज एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। सोशल मीडिया बैन सिर्फ एक चिंगारी थी, जिसने भ्रष्टाचार और असमानता के खिलाफ बड़ी आग को जन्म दिया। 51 से ज्यादा मौतें, हजारों कैदियों का फरार होना और सरकार का गिरना – सब यह दिखाता है कि हालात बेहद गंभीर हैं। अब देखना यह है कि क्या नेपाल सच्चे लोकतंत्र की ओर बढ़ेगा या फिर पुरानी ताकतें उसे पीछे खींच लेंगी।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. नेपाल में आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार व बेरोजगारी की वजह से।
Q2. अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
कम से कम 51 लोग, जिनमें एक भारतीय भी शामिल हैं।
Q3. कितने कैदी जेल से भागे?
करीब 12,500 कैदी पूरे देशभर से फरार हुए।
Q4. क्या नेपाल का अंतरिम प्रधानमंत्री तय हो गया है?
अभी फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सुशीला कार्की को काफी समर्थन मिल रहा है।
Q5. विदेशी नागरिकों के लिए क्या सुविधा दी गई है?
सरकार ने वीजा और एग्जिट नियम आसान किए हैं, ताकि वे सुरक्षित देश छोड़ सकें।