दिल्ली की हवा धुएं, धूल और हानिकारक गैसों का जहरीला मिश्रण बन गई है, जिससे लाखों लोगों के लिए, विशेषकर सर्दियों के महीनों में, रोजाना सांस लेना एक स्वास्थ्य समस्या बन गई है।
दिल्ली में प्रदूषण के कारण
- गाड़ियों से निकलने वाला धुआँ – दिल्ली में बढ़ रहे वाहनों की अधिक संख्या के कारण प्रदूषण भी अधिक बढ़ रहा है दिल्ली में 12 मिलियन से अधिक registered vehicles हैं। अधिकांश वाहन पेट्रोल या डीजल से चलते हैं, जो PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) पैदा करते हैं
- उद्योगों से बहने वाला कचरा या द्रव – दिल्ली और उसके आसपास के कारखानों से प्रदूषण फैलता है, विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों में और आस-पास के क्षेत्रों (जैसे गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा) में स्थित फैक्ट्रियां सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂), NOx और सूक्ष्म कण पदार्थ छोड़ती हैं। छोटे उद्योगों में कोयले जैसे गंदे ईंधन का उपयोग इसमें भारी योगदान देता है।
- निर्माण से उत्पन्न धूलकण – जोरो सोरो से चल रहे निर्माण कार्य से उड़ रही धूल शहरों में हर जगह मकान या पुल या सड़क का निर्माण कार्य हो रहा है जिससे धूल को नियंत्रित नहीं किया जा रहा है
- फसलों को जलाना – दिल्ली के पड़ोसी राज्य पंजाब और हरियाणा मौसमी पराली जलाने से अक्टूबर और नवंबर में प्रदूषण में बहुत तेजी आ जाती है पराली जलाने के कारण धूल के कण दूसरे राज्यों तक फैल जाते हैं जिससे प्रदूषण अधिक मात्रा में बढ़ जाता है सरकार ने भी इस पर अभी कोई रोकथाम नहीं की है
- कूड़ा-करकट को जलाना – खुले स्थान पर प्लास्टिक या कचरे को अवैध रूप से चलाना जिससे हवा और भी जहरीली हो जाती है हवा में धुआँ फैल जाता है जिसे सांस लेने में भी बहुत दिक्कत आ रही है
- पटाखों से बढ़ता प्रदूषण – सुप्रीम कोर्ट के प्रबंध के बावजूद भी दिवाली पर बहुत से लोग पटाखे जलाते हैं जिससे अनियंत्रित पॉल्यूशन होता है कुछ समय से देखा जा रहा है कि कोई बर्थडे पार्टी हो या छोटा-मोटा त्यौहार हो उसे पर भी बम पटाखे जलाए जाते हैं जिसे पॉल्यूशन बढ़ता जा रहा है
Seasonal Impact
| Season | Pollution Level | Key Causes |
| Summer | Moderate | Heat disperses pollutants |
| Monsoon | Low | Rain washes away pollutants |
| Post-monsoon | High | Stubble burning, festival smoke |
| Winter | Very High | Inversion, fog, stagnant air |
स्वास्थ्य पर प्रभाव :- पॉल्यूशन से स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है जिससे आंखों में जलन खांसी छींक,या गले के संक्रमण आम हो गए हैं लोगों में आमतौर पर देखा गया है फेफड़ों का कैंसर, हृदय रोग, और स्टॉक का खतरा बढ़ता जा रहा है विशेष रूप से बच्चों बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत हानिकारक स्थिति उत्पन्न हो रही है बहुत से लोगों में अस्थमा की शिकायत भी बढ़ती जा रही है
🌍 पर्यावरण पर पड़ रहा गहरा प्रभाव :- आमतौर पर देखा गया है पर्यावरण पर इसका बहुत गहरा प्रभाव पड़ रहा है जिससे पेड़ पौधों में कमी आ रही है और अम्लीय वर्षा हो रही है जिससे फसलों और इमारत को नुकसान होता है सर्दियों के समय में कोहरे का अधिक हो जाना इससे यातायात दुर्घटनाएं और उड़ान में देरी हो जाती है थोड़े-थोड़े समय में वर्षा का होना जिस मिट्टी दूषित हो जाती है इससे पर्यावरण पर बहुत प्रभाव पड़ रहा है
दिल्ली प्रदूषण पर निष्कर्ष :- दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण की समस्या एक गंभीर रूप ले चुकी है इससे वाहनों से निकलने वाले पॉल्यूशन औद्योगिक गतिविधियों निर्माण धूल फसल जलने और मौसम में प्रतिकूलता दिखाई देना सर्दियों के समय समस्या और भी बढ़ जाती है जब पराली जलने से निकलने वाला दुआ हवा में चारों तरफ फैल जाता है जिससे जहरीला धुआं बनता है और लोगों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन में बुरा प्रभाव पड़ता है सरकार द्वारा कई उपायों के बावजूद जैसे यातायात प्रतिबंध पटाखों पर प्रतिबंध इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और स्मोक टावरों का उपयोग करना इन सबके बावजूद भी पॉल्यूशन स्तर
धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है खासकर अक्टूबर से जनवरी तक समस्या और भी गंभीर हो जाती है लोगों ने दिल्ली से दूसरी जगह रहने का निर्णय भी ले लिया है बहुत से लोग अपनी जगह स्थान को छोड़कर दूसरे स्थान पर रहने लग गए हैं जहां पॉल्यूशन बहुत कम है इससे दिल्ली के रेवेन्यू पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ रहा है
📈 वर्तमान समय का प्रदूषण स्तर
दिल्ली का AQI, स्मॉग के चरम मौसम (नवंबर-जनवरी) के दौरान अक्सर निम्न स्तर पर पहुंच जाता है:
- 400–500+ (गंभीर से खतरनाक)
- सुरक्षित सीमा (WHO): PM2.5 < 15 µg/m³, दिल्ली में अक्सर यह 10-30 गुना अधिक हो जाती है।
