मेजर आशीष दहिया शौर्य चक्र से सम्मानित
मेजर आशीष दहिया शौर्य चक्र से सम्मानित, आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान साथी की रक्षा की
मेजर आशीष दहिया ने आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान अपने घायल साथी की रक्षा करते हुए अपने शरीर से उसको ढक लिया था और गोलियों की बौछार के बीच उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंच कर उसकी जान बचाई मेजर आशीष दहिया को शौर्य चक्र से सम्मानित किया
मेजर आशीष दहिया को गुरुवार के दिन राष्ट्रपति भवन में शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया यह पुरस्कार मिलने की घोषणा 26 जनवरी के मौके पर की गई थी और अब राष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित किया, जून 2022 से मेजर आशीष दहिया ने पांच जोखिम वाले अभियानों में चार कट्टर आतंकवादियों को और तीन इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइन को बेअसर कर दिया था और 2 जून 2024 को मेजर दहिया ने पुलवामा जिले के एक गांव में सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध ऑपरेशन की अगुवाई की थी
आतंकवादियों के खिलाफ अभियान में तलाश के दौरान आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी और ग्रेनेड फेंक कर भागने का प्रयास कर रहे थे जिस पर मेजर दहिया ने उनका जवाब भी गोलीबारी से दिया और भाग रहे आतंकवादियों को गंभीर रूप से घायल कर दिया मिशन गोलीबारी के बीच आतंकवादियों ने एक ग्रेनेड फेंका जिससे उनके ऑपरेशन के साथी को छर्रे लग गए । मेजर दहिया ने अपनी जान की परवाह नहीं की और रेंगकर तुरंत अपने साथी को अपने शरीर से ढक लिया

साथी को बचाने के लिए खुद को जोखिम में डाल दिया
अपने साथी की जान बचाने के बाद अपने सैनिकों के लिए खतरे को भांपते हुए मेजर दहिया ने बेजोड़ फील्ड क्राफ्ट का परिचय दिया जब चारों तरफ गोलियां चल रही थी तो उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने साथियों को वहां से सुरक्षित निकालने में मदद की जिससे उसकी जान बच गई और मिशन के प्रति निस्वार्थ प्रतिबद्धता, साहसिक योजना और लोगों के लिए समर्पण रखा योजना के सफल साहसिक योजना और एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन की भूमिका निभाने के लिए मेजर आशीष दहिया शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया
उनके पिता, पत्नी और भाई भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।
आशीष दहिया का परिवार हमेशा से ही देश में लगा हुआ है उनके पिता भी आर्मी में लांस नायक थे और उनके भाई अनीश भी सेवा में मेजर के पद पर आसीन हैं वहीं आशीष की पत्नी अनुषा भी भारतीय सेना का हिस्सा है आशीष मूल रूप से हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले हैं उनको यह सम्मान मिलने से गांव में खुशी का मुहूर्त छाया हुआ है