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क्या एयर इंडिया के विमान की बैटरी फट गई थी?

अहमदाबाद में एयर इंडिया के विमान हादसे के बाद पूरी दुनिया में बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं। इस विमान हादसे के पीछे इंजन का फेल होना बताया जा रहा है। मगर कुछ जानकारों का कहना है की बैटरी फटने जैसी कुछ और आशंकाओं को लेकर भी बात हो रही है। हादसे के बाद भारतीय विमानन एजेंसी नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA ने एयर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर बेड़े की सुरक्षा जांच के आदेश दिए हैं। यह आदेश हादसे में 241 लोगों की मौत के एक दिन बाद जारी किया गया। इसमें कहा गया है कि बोइंग के 787-8 और 787-9 हवाई जहाजों की हर उड़ान से पहले जांच होगी। सभी रिपोर्ट्स DGCA को सौंपी जाएंगी। वहीं, डीजीसीए ने एयर इंडिया को जेनएक्स इंजन वाले बोइंग 787-8 और 787-9 विमानों के अतिरिक्त रखरखाव का निर्देश दिया है। यह आदेश 15 जून से लागू हो गया है। टाटा ग्रुप की एयर इंडिया के बेड़े में 26 बोइंग 787-8 और 7 बोइंग 787-9 हैं। जानते हैं कि ये बोइंग ड्रीमलाइनर क्या हैं? क्या इस विमान की बैटरी भी फट गई थी? क्यों बोइंग ने मुनाफे की वजह से खामियां छिपाईं? इन सारे सवालों के जवाब समझते हैं।

विमान की बैटरी फट गई थी

क्या है बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ?

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर एक नया और आधुनिक जेट विमान है, जिसे अमेरिकी कंपनी Boeing ने बनाया है। यह मिड-साइज़ वाला, दो इंजनों से चलने वाला, और चौड़ा बॉडी वाला प्लेन है, जिसे खासतौर पर लंबी दूरी की यात्राओं के लिए तैयार किया गया है। यह पुराने बोइंग 767 विमान की जगह लेने के लिए आया है और बहुत ही ईंधन बचाने वाला (फ्यूल एफिशिएंट) है। इस प्लेन की सबसे खास बात यह है कि इसका लगभग आधा हिस्सा कार्बन फाइबर और अन्य हल्के मटेरियल्स से बना होता है। इससे यह विमान न सिर्फ मजबूत होता है बल्कि वजन में भी हल्का होता है, जिससे ईंधन की खपत कम होती है। ड्रीमलाइनर की खिड़कियां भी किसी भी आम हवाई जहाज के मुकाबले सबसे बड़ी होती हैं, जिससे बाहर का नज़ारा ज्यादा साफ दिखता है। इसके केबिन का प्रेशर ऐसी ऊंचाई के अनुसार सेट किया जाता है जिससे यात्रियों को सांस लेने में आसानी हो और कम थकान महसूस हो। इसके अलावा, प्लेन के अंदर रंग बदलने वाली एलईडी लाइट्स लगी होती हैं, जो अलग-अलग टाइम ज़ोन के अनुसार माहौल बदलने में मदद करती हैं और जेट लैग को कम करती हैं।

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में कैसी बैटरी का इस्तेमाल होता है

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में लिथियम-आयन बैटरी हैं, जो विमान की सहायक बिजली प्रणाली (APU) और फ्लाइट सिस्टम्स का बैकअप हैं।  इन बैटरियों को इसलिए चुना गया क्योंकि इनमें अधिक ऊर्जा स्टोर करने की क्षमता है और ये लंबे समय तक चलते हैं।  हालाँकि, इन बैटरियों में सुरक्षा संबंधी मुद्दे भी हैं।  2013 में, खासकर ओवरहीटिंग और आग लगने के कारण सभी ड्रीमलाइनर विमानों को कुछ समय के लिए उड़ानों से रोक दिया गया था।  जब बात एयर इंडिया के ड्रीमलाइनर विमान की दुर्घटना की है, तो अब तक सटीक वजहें नहीं मिली हैं और जांच जारी है।

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कितनी खतरनाक है ये बैटरी

बोइंग 787 ड्रीमलाइनर को ताकत देने के लिए इसमें दो लिथियम-आयन बैटरियों का इस्तेमाल होता है। इनमें से मुख्य बैटरी विमान के आगे के हिस्से में लगाई जाती है, जबकि दूसरी बैटरी पीछे की ओर ऊपर की तरफ होती है। ये बैटरियां काफी शक्तिशाली होती हैं, लेकिन उनमें आग लगने का खतरा भी होता है। लिथियम-आयन बैटरी 1,000 डिग्री सेल्सियस तक की गर्मी पैदा कर सकती है, जो कि ड्रीमलाइनर की कार्बन फाइबर बॉडी की गर्मी सहने की क्षमता (लगभग 343 डिग्री सेल्सियस) से तीन गुना ज्यादा है।

लिथियन ऑयन बैटरी में खराबी की बात सामने आई थी

सितंबर 2012 में जब एयर इंडिया लिमिटेड (AIL) ने अपने बेड़े में नए बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान शामिल किए, तो शुरुआत में ही एक बड़ी तकनीकी चुनौती सामने आई। इन छह नए विमानों में लिथियम-आयन बैटरी से जुड़ी समस्याएं पाई गईं। इस बैटरी में तकनीकी खराबी और आग लगने की आशंका के चलते, 17 जनवरी 2013 से लेकर 4 जून 2013 तक यानी चार महीने से भी ज्यादा समय तक, इन सभी विमानों को उड़ानों से पूरी तरह रोक दिया गया था। यह घटना बोइंग और एयर इंडिया दोनों के लिए एक गंभीर तकनीकी और भरोसे की चुनौती बन गई थी।

विमान के हिस्से जोड़ने का बदला तरीका

अप्रैल 2024 में बोइंग को लेकर एक गंभीर खुलासा सामने आया, जब कंपनी में काम करने वाले एक व्हिसलब्लोअर इंजीनियर सैम सालेह ने ड्रीमलाइनर 787 को लेकर सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं जाहिर कीं। सालेह, जो 10 वर्षों से अधिक समय तक बोइंग में कार्यरत रहे हैं, उन्हें न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि ड्रीमलाइनर की बॉडी के कुछ हिस्से सही तरीके से आपस में जुड़े नहीं हैं, जिससे उड़ान के दौरान वे टूट सकते हैं। उनका कहना था कि बोइंग ने विमान के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने के तरीके में बदलाव किया है, जिससे ये समस्या उत्पन्न हुई है। चूंकि ड्रीमलाइनर के बॉडी के अलग-अलग हिस्से कई कंपनियों द्वारा बनाए जाते हैं, इसलिए जब इन हिस्सों को जोड़ने की बारी आती है, तो वे एक-दूसरे से पूरी तरह मेल नहीं खाते, जिससे संरचनात्मक कमजोरी की स्थिति बनती है। यह खुलासा बोइंग की सुरक्षा प्रक्रियाओं और गुणवत्ता नियंत्रण को लेकर एक बार फिर सवालों के घेरे में ले आया।

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