China की वजह से यूरोप की अर्थव्यवस्था में भारी हलचल मच गई है, और कई कंपनियांओ को मुश्किलों में डाल दिए है

China news : 28 मार्च 2025 को दुनिया की सबसे बड़ी कर मार्केट को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है सीएनबीसी इंटरनेशनल की खबर के मुताबिक चीन पर पश्चिमी देशों की रेयर अर्थ मिनिरल्स के लिए निर्भरता अब यूरोप की कंपनियों को मुश्किल में डाल रहा है कार,मोबाइल, मिसाइल से लेकर फाइटर जेट तक यह मिनरल्स अब हर आधुनिक तकनीक को आधार बन चुके हैं पश्चिमी देश अब इससे बाहर निकालने की कोशिश में लगे हैं लेकिन अभी तक उठाए गए सभी कदम फेल होते दिख रहे हैं हाल ही में अमेरिका ने यूक्रेन के साथ डील कर इस संकट से निपटने की कोशिश की है लेकिन यूरोप की स्थिति बेहद खराब दिखाई दे रही है
इसे विस्तार से समझते हैं रेयर अर्थ मिनरल्स कुछ खास खनिज होते हैं जो बहुत जरूरी चीज़ों को बनाने में काम आते हैं। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV), पक्के मैग्नेट, कंप्यूटर चिप, सेमीकंडक्टर और सेना से जुड़ी मशीनों को बनाने में होता है। इनमें कुछ मुख्य खनिज हैं — नियोडिमियम (Nd), प्रासोडिमियम (Pr), टेर्बियम (Tb), और डाइस्प्रोसियम (Dy)।
China के सामने कोई नहीं टिकता 2024 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में रेयर अर्थ खनिजों का 69% खनन चीन करता है। यह जानकारी यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने दी है। IEA के अनुसार, रिफाइन किए गए (शुद्ध किए गए) रेयर अर्थ मिनरल्स का 90% से ज्यादा हिस्सा सिर्फ चीन से आता है। अप्रैल 2024 में चीन ने टेर्बियम समेत 7 रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात (एक्सपोर्ट) पर पाबंदी लगा दी।

लेकिन China को टक्कर देने के लिए यूरोपीय देशों ने नई – नई तकनीकों पर काम करना शुरू कर दिया है विकसित देश से अमेरिका, जापान, यूरोप ,अब खनिज उत्पन्न करने और रीसाइकलिंग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं अमेरिका के डिफेंस डिपार्टमेंट ने $4.2 मिलियन Rare Earth Salts कंपनी में लगाए हैं जो घरो के कचरो से रीसाइकलिंग करती है और जापान की टोयोटा भी नई तकनीक में निवेश कर रही है ताकि इन मिनरल्स की जरूरत कम हो EVs का पहला बैच रीसाइक्लिंग योग्य हो गया है इसे China से बाहर का स्टॉक धीरे-धीरे बन सकता है पर एक्सपर्ट मानते हैं कि रीसाइक्लिंग ऊर्जा-गहन, महंगी और धीमी प्रक्रिया है. साथ ही, रक्षा क्षेत्र में इन खनिजों की मांग कहीं ज्यादा है – जैसे एक F-35 फाइटर जेट में 900 पाउंड से ज्यादा रेयर अर्थ लगते हैं
China ने खेल की दिशा ही बदल दी: China ने सिर्फ रेयर अर्थ ही नहीं, गैलियम, जर्मेनियम, एंटिमोनी, टंगस्टन जैसे क्रिटिकल मिनरल्स पर भी एक्सपोर्ट रोक लगाई है. अमेरिका की 27% टंगस्टन जरूरतें चीन से पूरी करता हैं. और कार बैटरियों में भी टंगस्टन का इस्तेमाल होता है. China खुद अपनी 50% टंगस्टन खपत करता है. बाकी का एक्सपोर्ट करता है.
कई यूरोपीय कंपनियां अब परेशानी में हैं। क EV कार में औसतन 1.7 किलो रेयर अर्थ लगे होते हैं, जबकि पेट्रोल कार में सिर्फ 140 ग्राम. अमेरिका में अभी भी EV का हिस्सा 7.5% है, लेकिन China में आधे से ज्यादा नई कारें EV या हाइब्रिड हैं.
अब रेयर अर्थ खनिजों का सबसे ज़रूरी इस्तेमाल रक्षा क्षेत्र में हो रहा है। मिसाइल, लड़ाकू जेट, रडार और एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी जैसी चीज़ों में इनकी जरूरत बहुत जरूरी हो गई है। इसी वजह से अमेरिका और यूरोप अब चीन पर निर्भर न रहकर दूसरे देशों जैसे दक्षिण कोरिया में इन खनिजों की खुदाई बढ़ाने और इन्हें जमा करके रखने की तैयारी कर रहे हैं। अमेरिका, जापान और यूरोप अब रीसाइक्लिंग और दूसरे विकल्पों पर काम कर रहे हैं। वे इन नए आधार में निवेश भी कर रहे हैं। लेकिन चीन की सप्लाई चेन से बाहर निकलना अभी आसान बात नहीं है। खासकर रक्षा और ऑटो सेक्टर में आत्मनिर्भर बनने के लिए खनन, प्रोसेसिंग और नई तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश और रणनीतिक साझेदारी की जरूरत है।
