Indusind Bank भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और पूंजी बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) भी इस मामले की जांच कर रहे हैं। आईसीएआई के वित्तीय रिपोर्टिंग समीक्षा बोर्ड (एफआरआरबी) ने इस मामले की स्वतः समीक्षा शुरू कर दी है, आईसीएआई के अध्यक्ष चरणजोत सिंह नंदा ने डीएच को दिए साक्षात्कार में बताया।

पिछले दो सालों में डेरिवेटिव सौदों (Derivatives Deals) की गलत पहचान के कारण बैंक को संभावित नुकसान होने की बात सामने आने के बाद IndusInd Bank के लिए समय काफी मुश्किल होने वाला है।
(Derivatives Deals) क्या होती है
डेरिवेटिव सौदे (Derivatives Deals) ऐसे वित्तीय समझौते होते हैं जिनका मूल्य किसी दूसरी चीज पर निर्भर करता है, जैसे:
- शेयर (stocks)
- मुद्रा (currency)
- सोना-चांदी (commodities)
- ब्याज दरें (interest rates)
जैसे मान लीजिए आपको लगता है कि आने वाले समय में सोने की कीमत बढ़ेगी, लेकिन आप सीधे सोना नहीं खरीदते। इसके बजाय आप एक डेरिवेटिव सौदा करते हैं, जिसमें आप एक तय कीमत पर भविष्य में सोना खरीदने या बेचने का वादा करते हैं। अगर आपकी भविष्यवाणी सही निकली, तो आप मुनाफा होगा हैं। अगर गलत निकली, तो नुकसान होगा है।
अब सवाल ये पैदा होता है कि बैंक डेरिवेटिव सौदे क्यों करते हैं? बैंक ये सौदे जोखिम को कम करने,मुनाफा कमाने,ब्याज दर या मुद्रा के उतार-चढ़ाव से बचने के लिए करते हैं। लेकिन अगर ये सौदे ठीक से समझे या संभाले न जाएं, तो बैंक को भारी नुकसान हो सकता है — जैसा कि IndusInd Bank के मामले में हुआ।
देश की प्रमुख प्रोफेशनल सर्विस कंपनी PwC ने IndusInd Bank की फॉरेक्स डेरिवेटिव से जुड़ी जितनी भी गड़बड़िया हुई है अब उनकी अकाउंटिंग पूरी हो गई है रिपोर्ट का ड्राफ्ट वर्जन बैंक मैनेजमेंट को सौंप दिया गया है इस मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के मुताबिक बैंक अधिकारी इस ड्राफ्ट रिपोर्ट का अभी अध्ययन करेंगे और जल्द ही अपने रिपोर्ट PwC को भेजेंगे अधिकारियों ने कुछ समय पहले फार्म के सलाहकारों से भी बात की है की इतनी बड़ी गड़बड़ होने क्या वजह रही अब मैनेजमेंट इन सब सवालो उत्तर ढूंढने में जुट गई है

अक्टूबर 2024 में IndusInd Bank ने PwC को अपनी फॉरेक्स डेरिवेटिव लेन-देन में हुई गड़बड़ियों के लिए नियुक्त किया था जब जांच के दौरान PwC ने सिर्फ अकाउंटिंग का ही रिव्यू किया था न कि गड़बड़ी किसने और कब की, इसकी जिम्मेदारी अभी तय नहीं की है
यह मामला तब सामने आया जब बैंक ने शेयर बाजार को जानकारी दी थी कि उसके फॉरेक्स डेरिवेटिव अकाउंट्स में गड़बड़ी मिली है, जिससे बैंक की नेटवर्थ पर 1600 करोड़ रुपये तक का असर पड़ सकता है. यह राशि दिसंबर 2024 तिमाही के 1401 करोड़ रुपये के मुनाफे से भी ज्यादा है.
जब यह घोषणा हुई बैंक के शेयर में जोरदार गिरावट देखी गई और एक ही दिन में बैंक के शेयर 27% गिर गए और पिछले साल से अब तक 55% तक शेयर गिर चुके हैं बैंक का बाजार पूंजीकरण भी इतना गिर चुका है कि वह IDBI बैंक और यस बैंक से भी पीछे हो गया है
मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी कहा कि IndusInd Bank की वित्तीय स्थिति अभी स्थिर है और बैंक पर्याप्त रूप से पंजीकृत है. RBI ने इंडसइंड बैंक को हिदायत दिया है कि मार्च के अंत तक सभी संशोधनात्मक कदम पूरे किए जाएं.
इसके अलावा, बैंक ने Grant Thornton को फॉरेन्सिक जांच का जिम्मा सौंपा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर गड़बड़ी कैसे और कहां से शुरू हुई. इससे पहले बैंक ने KPMG और EY जैसी कंपनियों की भी मदद ली थी, ताकि ट्रेजरी नीतियों और फॉरेक्स डेरिवेटिव अकाउंटिंग की जांच हो सके.
Grant Thornton क्या होता है Grant Thornton एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनी है जो व्यवसायों को ऑडिट, टैक्स, सलाह और वित्तीय सेवाएं देती है। यह कंपनियों के खातों (accounts) की जांच करती है (Audit) और टैक्स से जुड़ी सलाह देती है एव बिज़नेस को सुधारने या चलाने में सलाह देती है फाइनेंशियल गड़बड़ियों की जांच में मदद करती है Grant Thornton की शुरुआत यू.के. (UK) में हुई थी।यह दुनिया के 130+ देशों में काम करती है। भारत में भी इसके कई ऑफिस हैं।
IndusInd Bank और Grant Thornton
आए कुछ उदाहरण से समझते है , IndusInd Bank में कुछ फॉरेक्स डेरिवेटिव सौदों में गड़बड़ी हो गई है। बैंक को शक है कि रिकॉर्डिंग या डीलिंग में कुछ गलत हुआ है, जिससे भविष्य में नुकसान हो सकता है। अब बैंक चाहता है कि कोई बाहर की विशेषज्ञ कंपनी आकर इसकी जांच करे ताकि सच सामने आ सके और भविष्य के लिए सुधार हो सके। इसलिए बैंक ने Grant Thornton को नियुक्त किया।