CM रेखा गुप्ता दिल्ली वालो के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर का उद्घाटन किया आईए जानते है इसके लाभ और किसको मिलेगी इसकी सुविधा कि एक अनोखी पहल .

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार नेशनल कैपिटल के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने वाली है शनिवार को दिल्ली में 33 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का उद्घाटन हुआ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार को 15 सरकारी अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों का भी उद्घाटन करेंगे ताकि जनता के लिए सस्ती जेनेरिक दवाइयां मिल सके इससे आम लोगों को काफी बचत होगी और उनकी जेब पर भी बोझ नहीं पड़ेगा प्रधानमंत्री मोदी ने एक पल की थी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भारत के बहुत से राज्यों में खुले हुए हैं इससे आम लोगों को काफी फायदा पहुंच रहा है
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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 33 में से एक आयुष्मान आरोग्य मंदिर का व्यक्तिगत रूप से उद्घाटन किया जबकि अन्य 6 को दिल्ली की जनता को समर्पित किया और बाकी आयुष्मान आरोग्य मंदिर का दिल्ली के कैबिनेट मंत्री उद्घाटन करेंगे इस आयोजन में शामिल होने वाले 6 कैबिनेट मंत्रियों में स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश वर्मा, पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, गृह एवं शिक्षा मंत्री आशीष सूद, समाज कल्याण मंत्री रविंद्र इंद्रराज सिंह और संस्कृति एवं कला मंत्री कपिल मिश्रा हैं.

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राजधानी में मौजूद 33 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में 29 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 4 उप-केंद्र शामिल हैं, जो पहले से कार्यरत हैं. इन केंद्रों का संचालन विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है, जिनमें दिल्ली नगर निगम (MCD), नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली सरकार का स्वास्थ्य विभाग शामिल हैं।
दिल्ली में सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर खोलने का ऐलान किया था. सरकार का लक्ष्य जनता को स्वास्थ्य सेवाओं का एक व्यापक दायरा प्रदान करना है, जिनमें रोकथाम, उपचार, पुनर्वास और देखभाल जैसी सुविधाएं शामिल होंगी. मौजूदा मोहल्ला क्लीनिकों की तुलना में ये केंद्र अधिक सेवाएं देंगे, जिनमें कैंसर की जांच, टीकाकरण और परिवार नियोजन पर खास फोकस रहेगा. हालांकि टीबी की जांच के लिए एनएएटी मशीनों की स्थापना अभी प्रक्रिया में है, तब तक रोग की पहचान पारंपरिक या वैकल्पिक जांच विधियों से की जाती रहेगी। दिल्ली सरकार ने अन्य राज्यों से अलग रुख अपनाते हुए इन केंद्रों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के बजाय एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों की तैनाती का फैसला किया है, ताकि चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखी जा सके।