ईरान-इज़राइल युद्ध : क्या भारत में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ सकता असर ?

ईरान-इज़राइल युद्ध में अगर अमेरिका ने ईरान पर कोई बड़ा हमला किया तो इसका असर भारत में कच्चे तेल और गैस की कीमतों पर पड़ सकता है। क्या तेल-गैस महंगी हो सकती है, जिससे भारत जैसे देशों को मुश्किल हो सकती है, क्योंकि भारत ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता हैं। ऐसे में सवाल उठता है – भारत के पास क्या कोई और ऑप्शन हैं?

ईरान-इज़राइल युद्ध

अगर अमेरिका कोई बड़ा हमला करता तो ईरान के तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों पर एक बार और चिंता का विषय बन जायेगा ,तेहरान स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज को बंद कर सकता है भारत के कुल तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज से आता है तो क्या अमेरिका के हमले से भारत में तेल और गैस के आयात में कोई कमी आएगी अब सोचने की बात की है कि भारत के पास इनका निर्यात करने का कोई और विकल्प है या नहीं

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ईरान-इज़राइल युद्ध में अगर स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज पर हमला होता है तो भारत पर इसका काफी गहरा प्रभाव पड़ेगा क्योकि इसके कुल आयात 5.5 मिलियन बैरल प्रति दिन में से लगभग 2 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चा तेल इस जलमार्ग से होकर गुजरता है। हालांकि अब भारत ने तेल खरीदने के लिए कई देशों से आयात करना शुरू कर दिया है (जैसे रूस, अमेरिका, सऊदी अरब आदि), तो अगर स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज (जहां से बड़ी मात्रा में तेल गुजरता है) बंद भी हो जाए, तो भारत पर इसका बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा। क्योंकि अब भारत सिर्फ एक ही रास्ते या देश पर निर्भर नहीं है, उसने अपने तेल के स्रोतों को कई हिस्सों में बाँट दिया है। इससे किसी एक जगह दिक्कत होने पर भी तेल मिलना जारी रह सकता है।

क्या भारत के पास कोई और विकल्प है

अगर भारत के पास कच्चे तेल और गैस की कमी होती है तो भारत के पास कई दूसरे रास्ते भी हैं। अगर कहीं से सप्लाई रुक भी जाए, तो रूस, अमेरिका और ब्राजील जैसे देशों से भारत को आसानी से तेल मिल सकता है। जो रूस से तेल आता है वह उस  रास्ते से नहीं आता जो ईरान और खाड़ी देशों से होकर गुजरता है (जैसे स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज)। ये तेल स्वेज नहर, केप ऑफ गुड होप या प्रशांत महासागर जैसे अलग रास्तों से आता है।

अगर भारत चाहे तो अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लातिनी अमेरिका से भी तेल मंगवा सकता है। हालांकि इन देशों से तेल थोड़ा महंगा पड़ सकता है , लेकिन ज़रूरत पड़ने पर ये अच्छे विकल्प हैं। कतर, जो भारत को सबसे ज्यादा गैस देता है, स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज रास्ते का इस्तेमाल नहीं करता, इसलिए वहां से सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया, रूस और अमेरिका से जो liquefied natural gas (LNG) आती है, वो भी सुरक्षित है। इन देशों से गैस सप्लाई पर स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज बंद होने का कोई खास असर पड़ेगा ।

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क्या तेल की कीमतों पर कोई असर होगा ?

जानकारों का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। आने वाले समय में तेल की कीमतें 80 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। भारत को अपनी ज़रूरत का करीब 90% कच्चा तेल बाहर से मंगाना पड़ता है, और लगभग आधी प्राकृतिक गैस भी विदेश से आती है। इसलिए भारत पर इसका असर ज़रूर पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) का कहना है कि अगर स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज (जो तेल सप्लाई का एक अहम रास्ता है) में कोई रुकावट आई, तो इसका असर दुनिया भर के तेल बाजारों पर साफ़ दिखेगा।

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