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COVID-19 : का डेल्टा वैरिएंट क्या है

COVID-19 के डेल्टा वैरिएंट से हो रहे साइलेंट हार्ट अटैक

(India Covid 19 Cases) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) इंदौर में चल रहे एक रिसर्च से पता चला है कि साइलेंट हार्ट अटैक व थायराइड जैसी समस्या कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट की वजह से सामने आ रही है इसकी रिसर्च आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के सहयोग से हुई है यह शोध जर्नल ऑफ प्रोटिओम रिसर्च में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया जा रहा है कि COVID-19 के विभिन्न वेरिएंट से मानव शरीर को किस प्रकार से प्रभावित किया जाता है इस जांच से यह पता करने में मदद मिलेगी कि COVID-19 किस प्रकार की बिमारिओ और समस्याओं को पैदा करता है और इससे भविष्य में कैसे बेहतर निदान और उपचार का रास्ता निकाला जा सकता है

COVID-19

COVID-19 की दोनों लहरों से मरीजों के आंकड़े लिए गए।

रिसर्च के लिए मशीन लर्निंग का इस्तेमाल किया सी-रिएक्टिव प्रोटीन, डी-डाइमर, फेरिटिन, न्यूट्रोफिल्स, ह्वाइट ब्लड सेल (डब्ल्यूबीसी) का काउंट, लिम्फोसाइट्स, यूरिया, क्रिएटिन और लैक्टेट जैसे मापदंडों की पहचान की गई। इस शोध का नेतृत्व आईआईटी इंदौर के डॉ. हेमचंद्र झा और केआइएमएस भुवनेश्वर के डॉ. निर्मल कुमार मोहकुद ने किया।

रिसर्च का हिस्सा बने ये लोग

मरीजों के डाटा का विश्लेषण भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) प्रयागराज की प्रोफेसर सोनाली अग्रवाल के निर्देशों में किया गया। इस अध्ययन में बुद्धदेव बराल, वैशाली सैनी, सिद्धार्थ सिंह, तरुण प्रकाश वर्मा, देब कुमार रथ, ज्योतिर्मयी बाहिनीपति, प्रियदर्शिनी पांडा, शुभ्रांशु पात्रो, नम्रता मिश्रा, मानस रंजन बेहरा, कार्तिक मुदुली, हेमेंद्र सिंह परमार, अजय कुमार मीना और सौम्या आर. महापात्रा और कुछ अन्य लोग भी शामिल हैं।

फेफड़ों पर भी की गई रिसर्च की।

COVID-19 के जांच कर्ताओं ने वायरस के प्रभाव को समझने के लिए मरीजों से डाटा के अलावा स्पाइक प्रोटीन (वायरस को कोशिकाओं से जोड़ने वाला प्रोटीन) के संपर्क में आने वाले फेफड़े और कोलन कोशिकाओं की भी जांच की इसमें पाया कि डेल्टा वेरिएंट से शरीर के रासायनिक संतुलन में सबसे बड़े महत्वपूर्ण कार्य में रुकावट उत्पन्न हुआ है इसने कैटेकोलामाइन और थायराइड हार्मोन उत्पादन से संबंधित मार्गों को प्रभावित किया, जिससे साइलेंट हार्ट फेलियर और थायराइड जैसी समस्याएं हुई हैं।

इस जांच को मेटा एनालिसिस का भी समर्थन मिला है जो यूरिया और अमोनिया एसिड मेटाबॉलिज्म में गड़बड़ी की ओर इशारा करता है इस अध्ययन में मल्टी ओमिक्स और रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी जैसी उन्नत तकनीक को भी शामिल किया गया इसका उपयोग इन रुकावटों को मापने के लिए किया गया था

इलाज के परिणामों को समझना महत्वपूर्ण हो सकता है।

“इस शोध से COVID-19 के दीर्घकालिक प्रभावों को समझना बेहतर होगा, जो स्वास्थ्य सेवा और उपचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

COVID-19 के नए वैरिएंट्स का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ रहा है

निष्कर्ष कर्ताओं से पता चलता है कि COVID-19 के विभिन्न वेरिएंट शरीर को किस तरह से प्रभावित करते हैं खासकर डेल्टा वेरिएंट जिसने मेटाबॉलिज्म और हार्मोनल मार्को में बड़े रुकावट पैदा करते हैं यह जांच लंबे समय तक रहने वाले कोविद लक्षणों को अधिक प्रभावित ढंग से प्रभावित करते हैं डॉ. हेमचंद्र झा, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईटी इंदौर।

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