G7 शिखर सम्मेलन 2025 : भारत को एक मजबूत रणनीतिक सहयोगी के रूप में मानते हैं, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती मनमानी का प्रभावी मुकाबला कर सकता है। भारत क्वाड (Quad) गठबंधन (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) का एक अहम सदस्य है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करना है।

G7 शिखर सम्मेलन 2025 देशों की बैठक इस समय कनाडा में हो रही है, और यह सम्मेलन भारत के लिए बेहद अहम बन चुका है। इसकी अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि जब तक भारत को आमंत्रण नहीं मिला था, तब तक देश के विपक्ष और पड़ोसी दुश्मन मुल्क पाकिस्तान ने भारत की आलोचना का कोई मौका नहीं छोड़ा। लेकिन जैसे ही भारत को आधिकारिक रूप से बुलावा मिला, सभी आलोचकों की बोलती बंद हो गई और माहौल पूरी तरह बदल गया।
2019 से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया के अमीर देश अपनी हर बैठक में बुलाते हैं यह भारत की वैश्विक स्थिति और उनके महत्व को दर्शाता है अमेरिका के हडसन इंस्टीट्यूट द्वारा 14 में 2023 के प्रकाशित हुई लेख में जिसका शीर्षक है India is Always Invited to G7. Why Is That So Important? भारत की दुनिया में बढ़ती की ताकत और लोकपिर्यता को महसूस किया था इस लेख में लिखा है कि भारत भविष्य में G7 का औपचारिक सदस्य भी बन सकता है क्योंकि उसकी आर्थिक और रणनीतिक का प्रभाव बढ़ रहा है हालांकि भारत की ओर से कुछ हिचकिचाहट हो सकती है आईए देखते हैं कि भारत की जैसी भूमिका किस तरह रही है यह कौन से कारण है जानते हैं
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- क्या भारत दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बनने वाला है: भारत इस वर्ष दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का मानना है कि भारत एक साल के अंदर ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है जी7 देश जो दुनिया की सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाएं हैं भारत को सप्लाई चैन यानी वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था का एक अहम हिस्सा मानते हैं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी G7 सम्मेलन में भारत को बुलाते हुए कहा है कि भारत का शामिल होना बहुत ही आवश्यक है क्योंकि आज वह आज दुनिया की सप्लाई चैन के केंद्र में है और आर्थिक और राजनीतिक चर्चाओं में उनकी एक अहम भूमिका रहती है
- भौगोलिक और राजनीतिक महत्व : G7 देश भारत को एक जिम्मेदार और लोकतांत्रिक देश के रूप में देख रहा है भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है जो तेज रफ्तार से ताकतवर बन रहा है और इसके अंदर सख्त शासन वाले देशों के असर को कम करने में काफी मददगार साबित भी हो रहा है भारत का इंडो-पैसिफिक इलाके में बहुत रणनीतिक तरीके से अहम् भूमिका निभा रहे खासकर चीन के बढ़ते असर को देखते हुए यही वजह है कि G7 देश के लिए भारत बहुत जरूरी भागीदारी बन गया है
- विकासशील देशों की आवाज़ बनना : G7 देश जो ज्यादातर अमीर और विकसित देश हैं अब भारत जैसे उभरते देशों के साथ दुनिया भर के मुद्दों पर उनकी सहमति बनना चाहते हैं भारत को विकासशील देशों की एक मजबूत आवाज भी माना जा रहा है भारत ने जब 2023 में जी-20 की अध्यक्षता की थी तो उसकी भूमिका और भी मजबूत हो गई अब G7 जैसे मंचों पर भारत की बात को नजरअंदाज करना काफी मुश्किल हो गया है हडसन इंस्टिट्यूट के एक लेख में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के 2022 के बयान का जिक्र भी किया गया है था उसमें कहा था कि यूरोप को यह सोच बदलनी होगी कि यूरोप की परेशानियां ही दुनिया की परेशानियां हैं जबकि ये सोच रखनी होगी की दुनिया की परेशानियां यूरोप की परेशानियां नहीं है भारत की g20 अध्यक्षता और 2023 में हुआ वॉइस ऑफ ग्लोबल साउथ सम्मेलन इस बात का सबूत है कि भारत और विकासशील देशों की बात दुनिया के बड़े मंचों तक पहुंचने में सक्षम साबित हो रहा है
- दुनियाभर की समस्याओं के समाधान में भागीदारी : G7 शिखर सम्मेलन में कई बड़े-बड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है जैसे जलवायु बदलाव डिजिटल तकनीक ऊर्जा की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शांति जैसे मुद्दों पर चर्चा का विषय बनते हैं भारत इन सभी क्षेत्रों में अपने नीतियों और तकनीकी तरक्की जैसे कि हरित ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था के जरिए एवं भूमिका निभा रहा है इसके अलावा भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है इसलिए वह G7 देश के लोकतांत्रिक मुद्दों के साथ अच्छी तरह मेल खाता है और कुछ अहम बातें हैं जो भारत को चीन जैसे देशों से अलग बनाती है जो G7 के लिए रणनीतिक चुनौतियां पैदा करती हैं
- PM मोदी का व्यक्तिगत प्रभाव : 2019 से भारत को G7 शिखर सम्मेलन में बुलाया जा रहा है 2020 में कोविड के चलते नहीं बुलाया गया था यह भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में विदेश नीति को एक बेहतरीन छवि दिखता है और भारत देश को वैश्विक और औद्योगिक नजरिया से मजबूत भी बनता है पीएम मोदी को एक सरदार नेताओं के रूप में देखा गया है जिनके अंदर फैसले लेने की क्षमता शामिल है G7 देश भारत के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी से सीधा बातचीत करना जरूरी समझते हैं ना की किसी अन्य को बीच में लेकर बात करते हैं
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- चीन के मुकाबले भारत की रणनीतिक : आजकल अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की सबसे बड़ी चिंता चीन की तरफ से है इसकी वजह सिर्फ चीन की आक्रामक नीतियां नहीं है बल्कि वह लोकतंत्र और गैर-मौजूदगी भी एक बड़ा कारण बनता जा रहा है चीन जैसे सत्तावादी तानाशाही देश के बढ़ते प्रभाव को संतुलन करने की क्षमता केवल भारत ही रखता है पिछले कुछ महीना पहले भी चीन की सीमाओं पर अवैध कब्जाधारी हुई थी लेकिन उसका मुंह तोड़ जवाब भारतीय सैनिकों ने दिया इसके बाद पीएम मोदी ने चीन को खुली शब्दों में चेतावनी भी दे दी कि अगर भारत की तरफ देखा तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा अभी हाल ही में पाकिस्तान भी इसका अंजाम भुगत चुका है G7 देश भारत को एक भरोसेमंद और मजबूत सहयोगी भी मानते हैं जो इंडो पेसिफिक क्षेत्र में चीन की आक्रामक गतिविधियों का संतुलन और शांतिपूर्ण तरीके से जवाब दे सकता है भारत क्वाड (Quad) समूह का भी हिस्सा है जिसमें अमेरिका जापान और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल है यह समूह चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने और इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में एम भूमिका निभा रहे हैं
- भारत जैसे देश G7 में होना बहुत जरुरी है : हडसन इंस्टीट्यूट के लेख के अनुसार, G7 का असर धीरे-धीरे कम होता जा रहा है भारत जैसे मजबूत देश को G7 के साथ जोड़ना इसकी महत्वता को फिर से स्थापित करने का एक तरीका हो सकता है G7 राष्ट्रीय भारत को एक जवाब दे और लोकतंत्रिकता ताकत के रूप में देखते हैं जो रूस और चीन जैसे रूढ़िवादी और तानाशाही देश से बिल्कुल अलग बनाते हैं हालाँकि लेख में यह भी बताया गया है कि भारत की G7 जैसे समूह में पूरी तरह जुड़ने को लेकर थोड़ा संकोच करता है भारत हमेशा से स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का नीति के पक्ष में रहा है G7 जैसे पश्चिमी प्रधान से गहरे जुड़ाव होने से उनकी गुटनिरपेक्षता नीति पर गहरा असर पड़ा है इसके अलावा चीन के साथ पहले से चल रहे तनाव को देखते हुए G7 के करीब आना भारत चीन संबंधों को और बिगाड़ सकता है यह भी एक चिंता का विषय बना हुआ है