RBI Monetary Policy: RBI की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) और Repo Rate अपडेट 2025, इसका असर EMI, और जानिए क्या है नया
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) समय-समय पर Monetary Policy यानी मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। इस नीति का सबसे अहम हिस्सा होता है Repo Rate। Repo Rate वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक कर्ज़ देता है। Repo Rate में बदलाव का सीधा असर EMI, महंगाई, लोन, और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
हाल ही में RBI ने 1 अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति (Monetary Policy Committee – MPC) बैठक में Repo Rate को 5.5% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। यह लगातार दूसरी बार है जब RBI ने Repo Rate में कोई बदलाव नहीं किया।
इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे:
- RBI Monetary Policy क्या है?
- Repo Rate क्या होता है और इसका महत्व
- 1 अक्टूबर 2025 की RBI घोषणा
- Repo Rate का असर EMI, Inflation और आम आदमी पर
- RBI के फैसले का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- 2025 में आगे क्या हो सकता है
RBI Monetary Policy का मतलब है – भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा लिए गए ऐसे फैसले, जिनका उद्देश्य देश की मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करना, आर्थिक विकास को संतुलित करना और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना होता है।
RBI हर 2 महीने में MPC (Monetary Policy Committee) की बैठक करता है और Repo Rate, Reverse Repo Rate, CRR (Cash Reserve Ratio), SLR (Statutory Liquidity Ratio) जैसे कई अहम फैसले लेता है।
Monetary Policy के दो प्रकार होते हैं:
- Expansionary Policy (विस्तारवादी नीति): जब अर्थव्यवस्था को गति देनी हो तो RBI ब्याज दर घटाता है।
- Contractionary Policy (संकुचन नीति): जब महंगाई ज़्यादा हो तो RBI ब्याज दर बढ़ाता है।
Repo Rate क्या है?
Repo Rate वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को लोन देता है। जब Repo Rate बढ़ता है, तो बैंकों के लिए पैसा महँगा हो जाता है और वे ग्राहकों को भी महंगे लोन देते हैं। इससे EMI और ब्याज दरें बढ़ जाती हैं।
जब Repo Rate घटता है तो EMI सस्ती हो जाती है और मार्केट में पैसा ज़्यादा घूमता है।
आसान भाषा में:
- Repo Rate ↑ (बढ़ा) → EMI महँगी, Inflation कम करने में मदद।
- Repo Rate ↓ (घटा) → EMI सस्ती, Growth बढ़ाने में मदद।
1 अक्टूबर 2025 की RBI घोषणा
RBI गवर्नर शक्ति कांत दास की अध्यक्षता में हुई MPC बैठक में यह फैसला लिया गया कि Repo Rate 5.5% पर स्थिर रहेगा।
यह लगातार दूसरी बैठक है जब Repo Rate में कोई बदलाव नहीं किया गया। RBI का मानना है कि महंगाई धीरे-धीरे नियंत्रित हो रही है लेकिन अभी जोखिम बने हुए हैं।
RBI के मुख्य पॉइंट्स (अक्टूबर 2025 अपडेट):
- Repo Rate: 5.5% (बिना बदलाव)
- Reverse Repo Rate: 3.35%
- Inflation अनुमान: 5.2% – 5.4%
- GDP Growth Projection: 6.5% – 6.6%
- EMI में फिलहाल कोई बदलाव नहीं
Repo Rate का असर EMI और आम आदमी पर
RBI के फैसले का सीधा असर हर उस व्यक्ति पर पड़ता है जिसने होम लोन, पर्सनल लोन, कार लोन या एजुकेशन लोन लिया है।
- Home Loan EMI: Repo Rate में बदलाव से बैंक अपनी ब्याज दरें (MCLR, EBLR) बदलते हैं। Repo Rate स्थिर रहने से EMI में कोई बदलाव नहीं होगा।
- Car Loan & Personal Loan: इनकी EMI भी फिलहाल स्थिर रहेगी।
- नए लोन लेने वाले: नए ग्राहकों के लिए ब्याज दरें Repo Rate के हिसाब से ही तय होती हैं।
कुल मिलाकर, अभी राहत की स्थिति है क्योंकि EMI नहीं बढ़ेगी।
Repo Rate और Inflation (महंगाई)
RBI का सबसे बड़ा मकसद है महंगाई को कंट्रोल करना।
- अगर Inflation ज़्यादा हो → Repo Rate बढ़ाया जाता है।
- अगर Growth धीमी हो → Repo Rate घटाया जाता है।
अभी महंगाई (CPI – Consumer Price Index) लगभग 5.3% के आसपास है, जो RBI के लक्ष्य 2-6% की सीमा में है। इसलिए Repo Rate में कोई बदलाव नहीं किया गया।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
RBI के इस फैसले का असर कई क्षेत्रों पर पड़ेगा:
- रियल एस्टेट सेक्टर: EMI स्थिर रहने से घर खरीदने वालों के लिए थोड़ी राहत।
- ऑटोमोबाइल सेक्टर: कार लोन महँगे नहीं होंगे, डिमांड बनी रहेगी।
- स्टॉक मार्केट: स्थिर Repo Rate से मार्केट में स्थिरता।
- बचत और निवेश: FD और RD की ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रहेंगी।
आगे क्या उम्मीद? (2025 का अनुमान)
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में RBI Repo Rate में बदलाव तभी करेगा जब महंगाई बढ़ेगी या GDP Growth बहुत धीमी होगी।
- अगर Global Oil Prices बढ़े → Inflation बढ़ सकता है।
- अगर Monsoon अच्छा रहा → Inflation कम हो सकता है।
- अगर USA और Europe में मंदी आई → भारत की पॉलिसी बदल सकती है।
निष्कर्ष
- RBI Monetary Policy Repo Rate 2025 का मुख्य संदेश यही है कि RBI फिलहाल सावधानी से कदम उठा रहा है। Repo Rate 5% पर स्थिर रखकर RBI ने संकेत दिया है कि अभी महंगाई और विकास दोनों को संतुलन में रखना ज़रूरी है।
- आम आदमी के लिए राहत की बात है कि EMI फिलहाल नहीं बढ़ेगी। लेकिन भविष्य की चुनौतियाँ (Global Market, Oil Prices, Weather Impact) RBI के अगले फैसले को प्रभावित करेंगी।