सनातन धर्म में ज्येष्ठ पूर्णिमा का बहुत खास महत्व है। इस दिन वट पूर्णिमा व्रत (Vat Purnima Vrat 2025) का आयोजन सुहागिन महिलाएं करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से पति को लंबी उम्र का आशीर्वाद मिलता है और वैवाहिक जीवन में सुख और शांति बनी रहती है। इसके साथ ही, कई शुभ परिणाम भी देखने को मिलते हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा का दिन सुहागिन महिलाओं के लिए खास होता है, और वे इसका बेसब्री से इंतजार करती हैं। इस दिन वट पूर्णिमा व्रत किया जाता है, जो इस बार 10 जून को मनाया जाएगा, जैसा कि वैदिक पंचांग में बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को सही तरीके से करने से वैवाहिक जीवन में खुशियों की बहार आती है।
मां लक्ष्मी की कृपा से हमारे घर में हमेशा सुख और शांति बनी रहती है। इस खास दिन पर बरगद के पेड़ की पूजा करने का महत्व है। अगर हम इस पेड़ की पूजा नहीं करते, तो हमारा व्रत सफल नहीं होता। यदि आप अपने वैवाहिक जीवन में किसी समस्या का सामना कर रहे हैं, तो वट पूर्णिमा व्रत के दिन कुछ खास उपाय जरूर करें। ऐसा माना जाता है कि इन उपायों से आपके वैवाहिक जीवन में खुशियों की बहार आती है और पति-पत्नी के रिश्ते में मिठास बढ़ती है। तो चलिए, जानते हैं वट पूर्णिमा व्रत (Vat Purnima Vrat 2025 Upay) के उपायों के बारे में।
वट पूर्णिमा के दिन, विधिपूर्वक बरगद के पेड़ की पूजा करना बहुत महत्वपूर्ण है। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और फिर पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा बांधते हुए 7 बार परिक्रमा लगाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस विधि को अपनाने से व्रत सफल होता है और वैवाहिक जीवन में खुशियों की भरमार होती है।

इसके अलावा, वट पूर्णिमा के दिन मंदिर में या जरूरतमंद लोगों को दान देना बहुत जरूरी है। कहा जाता है कि इस दिन दान करने से धन की प्राप्ति के अच्छे योग बनते हैं। साथ ही, इससे जीवन में किसी चीज़ की कमी नहीं होती है।
व्रट पूर्णिमा व्रत 2025 की तारीख और शुभ मुहूर्त (Vat Purnima Vat 2025 Date and Shubh Muhurat) के अनुसार, वैदिक पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि 10 जून को सुबह 11 बजकर 35 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, यह तिथि 11 जून को दोपहर 01 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। इसलिए, 10 जून को व्रट पूर्णिमा का व्रत किया जाएगा। ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 02 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 04 बजकर 22 मिनट से 05 बजकर 23 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 17 मिनट से 07 बजकर 38 मिनट तक निशिता मुहूर्त – रात 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजकर 41 मिनट तक
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